विकृत स्वर

संगीत विधा में विकृत स्वरों का प्रयोग बहुसंख्यक लोगो के मन में नकारात्मक विचार ले कर आता है। पुराने समय से ही विकृत स्वरों के प्रयोग का प्रचलन रहा है। आज भी हो रहा है। विद्यार्थियों के मन में बराबर यह शंका पैदा की जाती है कि उनसे बचे। कोई उन्हें यह नहीं बताता की विकृत स्वरों से बचाना नहीं है उनका विशेष प्रयोग करना है। शब्द के इतिहास में अगर हम जाय तो विकृत शब्द का अर्थ कदापि गन्दगी या खराबी से नहीं रहा है, यह अर्थ इसमें शब्दों के लाक्षणिक प्रयोग के नाते जुड़ गया और रूढ़ हो जाने के कारण इस अर्थ में जाना जाने लगा। हमारे संगीत मनीषियों ने या फिर साहित्यकारों ने इसको "विशिष्ट कृति" के आधार पर समझा है। -अप्रमेय -

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