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Saturday, January 23, 2016

कुछ छोटे-मोटे

१-एक शाम कोई मेरी ऐसी भी गुजर जाए
मैं सच कहूँ और वो इसे मान भी जाए ।।


२-सिमटा कि फ़ैल गया 
है यही मेरा फ़साना,
लबे तरन्नुम जो कभी गजल रही
गा रहा उसे अब जमाना ।।

३-खुद कह दूँ तो भरोसा हो न पाएगा
तुम्ही कहो कि फिर कह दूँ कैसे 

४-गुजर रहा है वह सरे जिंदगी में ऐसे 
बरस रहा हो सावन झील में जैसे
 
५-तुम दूर हो कर भी पास ऐसे हो मेरे
जैसे धड़कता है दिल दूर तेरा मुझमें

६-अपने होने को धुआं सा समझता मैं रहा
ये अलग बात है कि उम्र भर धूँ धूँ कर जलता ही रहा 

७-अब क्या बताए कि बताए क्या 
है वही बात कि बात बताए क्या 

(अप्रमेय )

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