Tuesday, January 7, 2014

परदा और आदमी :

घर में टंगे परदे की तरह
कभी-कभी यूँ ही
बीत जाता है दिन ,
परदों का झूलता रहना
दुनिया में आदमी का
झूलते रहने की तरह है
और परदों पर बने सुन्दर फूल
आदमी के दिमाग में
चिपके सुन्दर सपनों की तरह हैं ,
मैं सोचता हूँ …
अगर ये सपने न होते
तो शायद ये परदे न होते ,
आदमी और परदे का रिश्ता
बहुत करीबी है
यह तब पता चलता है
जब कभी-कभी
यूँ ही बीत जाता है दिन ,
मसलन शांत कमरे में
लटका हुआ परदा
किसी बूढ़े की दाढ़ी सा दीखता है
और उसका टंगा रहना
आप को दुनिया में
टंगे रहने की खामोश हिदायत देता है ,
वैसे परदा मेरे ख्याल से
टंगा रहना चाहिए
हर खिड़की पर
ताकि आप देख न सकें बाहर
आज किसी को फुर्सत नहीं है
आप के घर के अंदर झाकनें में
सभी व्यस्त हैं कुछ ढकने में
अपने-अपने घर के
खिड़कियों पर परदा लगाने में।
( अप्रमेय )  

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