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Tuesday, January 1, 2019

नए वर्ष का पता

मैं चुप था नए वर्ष की सुबह
कि इस आगमन को
अनुभव करूँगा सूर्य के साथ
या फिर फूल-पत्तियों के बीच पर
इन्होंने कोई ब्यौरा नहीं दिया
न ही कोई संकेत ही किया कि
हम नए वर्ष में प्रवेश कर चुके हैं,
मैं घर की छत पर चिड़ियों के बनाए
घोंसले की ओर मुखातिब हुआ पर
मुझे देखते ही वहां बैठी चिड़िया उड़ गई
नए वर्ष का आगमन वहां भी
न तो घोंसले में पड़ा मिला
न ही छत पर बिखरे बह कर आये
धूल की महक में और
न ही कागजों के छोटे कतरनों में
खबर सा ही दिखा,
नए वर्ष के संदेश से भरा मोबाइल
दोस्तों और रिश्तेदारों की
फोटो से भरा पटा है,
सभी नया वर्ष मना रहे हैं
और एक मैं हूँ कि
नए वर्ष को दिन भर
गली-मुहल्ले, चौराहे-शहर
दुकान-मकान खोजते
मंदिरों की चौखटों तक पहुंच गया
पर नया वर्ष वहां भी लापता रहा,
रात होने को थी और अंधरे में
मैं उदास घर लौटने को हुआ कि
अचानक एक भूखे  पागल को
अपनी तरफ आता देख घबरा गया
वो बता सकता था शायद मुझे
नए वर्ष का पता
पर तबतक मेरी हिम्मत ने
जवाब दे दिया था ।
(अप्रमेय)

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