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Saturday, January 4, 2020

नव वर्ष की मंगल कामनाएं

चली आती ही है चिड़िया रोज
हमारे छत पर अनाज के बहाने,

हम भी तो उनके बाग गेंद ढूंढने के बहाने
इधर-उधर निहारते
आम के पेड़ से टिकोरे
तोड़ ही लाते थे,

छांव के बहाने ही सही दौड़ती सड़क पर
रुक ही जाते हैं  राहगीर, गाय-गोरु और
ठेलेवाले!

परदेस में बगलगीर को सुबह टहलने के ही बहाने
नमस्कार करते हम उनके परिवार का
हिस्सा बन ही जाते हैं,

मंच पर बाजा रखने के बहाने
एकाध सुर दबाते चेले
धीरे-धीरे गुर जान ही जाते हैं!

नए वर्ष के बहाने ही सही
हम सभी एक दूसरे की सलामती की दुआ
कर ही आते हैं।
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अप्रमेय

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