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Sunday, September 13, 2020

कह देना उनसे

सुनो उनसे कह देना
अब पत्तों के झरने की आवाज 
नहीं सुनाई पड़ती
टूटते तारे अब 
मनौती पूरी नहीं कर पाते
फूल अब जड़ों की कहानी 
भौरों को बिना बताए 
रस भर पिला देते हैं
एक शहर से निकलते
दूसरे शहर तक जाते रास्ते
अब बिना चाय पिये
हांफ रहे हैं
चिड़िया चुप है
नदियों से उसने पानी पीना छोड़ दिया है
गिलहरी ने कुँए के अंदर 
बनाया है अपना घर
कल रात एक बुजुर्ग को
मैंने सुनाई अपनी बात
उसने कहा कवि हो ?
मैंने कहा नहीं 
पहले था कभी 
अभी फिलहाल
पागल हूँ।
(अप्रमेय)

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